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FIR दर्ज, नोटिस जारी फिर भी कार्रवाई नहीं! शाहबाज गांव के कथित अनधिकृत G+5 निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

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नोटिस, FIR, फिर भी निर्माण खड़ा! शाहबाज गांव में अवैध बिल्डिंग को लेकर बड़ा सवाल

परमेश्वर सिंह | नवी मुंबई : नवी मुंबई के शाहबाज गांव, सेक्टर-19 में स्थित एक बहुमंजिला G+5 भवन को लेकर गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों, महानगरपालिका के नोटिस और दर्ज FIR के आधार पर यह मामला अब केवल निर्माण नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कथित अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का विषय बन चुका है। मामला निर्मल सदन अपार्टमेंट, हाउस नंबर-711, सेक्टर-19, शाहबाज गांव, बेलापुर से संबंधित है। उपलब्ध दस्तावेजों में संबंधित निर्माण को लेकर कार्रवाई किए जाने और पुलिस में मामला दर्ज होने का उल्लेख है। NMMC की शिकायत के बाद दर्ज हुई FIR  के अनुसार NRI सागरी पुलिस स्टेशन में वर्ष 2025 में FIR No. 96/2025 दर्ज की गई है। मामले में महाराष्ट्र रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एक्ट, 1966 की धारा- 53, 53(1A) एवं 54 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। FIR में शिकायतकर्ता के रूप में नवी मुंबई महानगरपालिका से जुड़े अधिकारी द्वारा कथित अनधिकृत निर्माण के संबंध में FIR दर्ज कराई गई है। जांच में कथित अनधिकृत निर्माण का उल्लेख संबंधित भूमि और भवन का निरीक्षण महानगरपालिका के अधिकारियों द्वारा किया गया था। जांचउपरांत यह पता चला कि बिल्डिंग बिना अनुमति के निर्माण किया गया है। मामले में बालिराम पंढरीनाथ कुंभार का नाम आरोपी के रूप में दर्ज है। हालांकि, किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी अथवा दोष का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन रहेगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब महानगरपालिका की जांच के बाद मामला पुलिस तक पहुंच चुका है और FIR भी दर्ज हो चुकी है, तब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कथित अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध जमीनी स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही है?, नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप – मामले से जुड़े लोगों का आरोप है कि संबंधित निर्माण के विरुद्ध महानगरपालिका की ओर से कार्रवाई संबंधी नोटिस जारी किया गया था और 24 घंटे के भीतर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी। लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद मौके पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इससे स्थानीय नागरिकों के बीच प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। जब निर्माण को लेकर महानगरपालिका ने कार्रवाई शुरू की, तो उसे अंतिम परिणाम तक क्यों नहीं पहुंचाया गया?, क्या संबंधित भवन के सभी निर्माण हिस्से स्वीकृत नक्शे और वैधानिक अनुमति के अनुरूप हैं? यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध पाया गया था तो अब तक स्थिति जस की तस क्यों है? “कानून सभी के लिए समान होना चाहिए” स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर नियोजन और भवन निर्माण संबंधी कानूनों का पालन सभी नागरिकों के लिए समान रूप से होना चाहिए। यदि किसी निर्माण के संबंध में महानगरपालिका द्वारा जांच की जाती है, नोटिस जारी किया जाता है और उसके बाद संबंधित कानून के तहत FIR दर्ज होती है, तो मामले को गंभीरता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है। तोड़क कार्रवाई में देरी से केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल नहीं उठते, बल्कि भविष्य में अन्य लोगों को भी नियमों की अनदेखी करने का संदेश जा सकता है। FIR दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई का इंतजार– यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर केवल शिकायत नहीं हुई, बल्कि नगर नियोजन कानून की धाराओं के अंतर्गत पुलिस में मामला भी दर्ज किया गया। अब स्थानीय लोगों की निगाहें नवी मुंबई महानगरपालिका, पुलिस प्रशासन और संबंधित नगर नियोजन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। नागरिकों का कहना है कि उन्हें किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई से अधिक इस बात की चिंता है कि यदि कानून के उल्लंघन का मामला दर्ज हो चुका है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई आखिर कब पूरी होगी? शाहबाज गांव, सेक्टर-19 के इस मामले में अब प्रशासन की अगली कार्रवाई यह तय करेगी कि जारी नोटिस और दर्ज FIR केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेंगे या वास्तव में कथित अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

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