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नवी मुंबई में जर्जर इमारतों पर सख्ती: 30 साल पुरानी बिल्डिंग्स का स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

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परमेश्वर सिंह / नवी मुंबई: शहर में बढ़ते हादसों और मानसून से पहले सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए  (NMMC) ने इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। मनपा ने साफ किया है कि 30 वर्ष से अधिक पुरानी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट अब पूरी तरह अनिवार्य है, और इसमें लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मनपा के अनुसार, हर वर्ष बारिश से पहले शहर की इमारतों का विस्तृत सर्वेक्षण किया जाता है। इस दौरान जो इमारतें खतरनाक स्थिति में पाई जाती हैं, उन्हें महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की धारा 264 के तहत “खतरनाक” घोषित कर दिया जाता है। विशेष रूप से C-1 श्रेणी की इमारतों को तत्काल खाली कराने के लिए संबंधित सोसायटियों को नोटिस जारी किए जाते हैं, जैसा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों में भी उल्लेखित है। क्या कहते हैं नियम?- प्रशासन ने बताया कि 30 वर्ष से अधिक पुरानी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट एक वर्ष के भीतर कराना अनिवार्य है। वहीं, सहकारी हाउसिंग सोसायटी के मॉडल बाय-लॉ के अनुसार 15 से 30 वर्ष पुरानी इमारतों का हर 5 वर्ष में और 30 वर्ष से अधिक पुरानी इमारतों का हर 3 वर्ष में ऑडिट कराना जरूरी है। यह ऑडिट केवल मनपा में पंजीकृत स्ट्रक्चरल इंजीनियर से ही कराया जा सकता है। बिना अनुमति निर्माण पर सख्त चेतावनी, हाल के दिनों में यह देखा गया है कि कई फ्लैट मालिक अपने घरों में फ्लोरिंग बदलने, दीवारों में बदलाव करने या RCC कॉलम और बीम में छेड़छाड़ जैसे कार्य बिना विशेषज्ञ की देखरेख के कर रहे हैं, जिससे इमारतों की संरचना कमजोर हो रही है और हादसों का खतरा बढ़ रहा है। मनपा ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की मरम्मत या स्ट्रेंथनिंग के लिए आवश्यक अनुमति लेना और पंजीकृत इंजीनियर की निगरानी में ही काम करना अनिवार्य है। हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार?, प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि नियमों की अनदेखी कर किए गए कार्यों के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो संबंधित फ्लैट मालिक के साथ-साथ सोसायटी के अध्यक्ष और सचिव को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा। नागरिकों से अपील, मनपा ने नागरिकों, इमारत मालिकों और हाउसिंग सोसायटियों से अपील की है कि वे समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट कराएं, नियमों का पालन करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें। प्रशासन का कहना है कि यह कदम भविष्य में संभावित दुर्घटनाओं को रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है।

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