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मुलुंड रीडेवलपमेंट में ₹2.55 करोड़ का खेल! पार्टनर ही निकले ‘धोखेबाज’, नवघर पुलिस ने दर्ज की FIR

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परमेश्वर सिंह / मुंबई : मुंबई के तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट सेक्टर से एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जहां भरोसे और साझेदारी की आड़ में करोड़ों रुपये का खेल खेला गया। मुलुंड पूर्व के चर्चित रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में ₹2.55 करोड़ की कथित हेराफेरी के आरोप में नवघर पुलिस ने अमरदीप कंस्ट्रक्शन कंपनी के दो पार्टनरों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। इस सनसनीखेज मामले में आरोपी हैं- कमलेश दामजी मिनात और प्रेमजी वेलजी पटेल- जिन पर आरोप है कि उन्होंने फ्लैट बिक्री से प्राप्त रकम को कंपनी से छुपाकर खुद हड़प लिया। ‘दोस्ती से दुश्मनी’: पार्टनरशिप में दरार से खुला घोटाला पूरे मामले की शुरुआत एक अंदरूनी शिकायत से हुई। कंपनी के ही पार्टनर जेराम जेठा गामी (62), निवासी वाशी, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2011 में बनी अमरदीप कंस्ट्रक्शन कंपनी चार साझेदारों के बीच बराबर हिस्सेदारी के साथ शुरू हुई थी। लेकिन 2014 में मुलुंड पूर्व के 90 फीट रोड पर “अनुथम प्रोजेक्ट” शुरू होते ही समीकरण बदलने लगे। आरोप है कि प्रोजेक्ट की बढ़ती कीमत और संभावित मुनाफे को देखते हुए मिनात और पटेल ने दबाव बनाकर अपनी हिस्सेदारी 33-33 प्रतिशत कर ली, जबकि गामी भाइयों की हिस्सेदारी घटाकर 17-17 प्रतिशत कर दी गई। कैश का खेलफ्लैट बिके, लेकिन कंपनी तक नहीं पहुंचा पैसा, एफआईआर में दर्ज आरोपों के अनुसार, आरोपियों ने कंपनी के नियमों को दरकिनार करते हुए तीन फ्लैट बेचे और करोड़ों रुपये नकद में वसूले, फ्लैट 602 (A विंग) – कीमत ₹1.10 करोड़, जमा सिर्फ ₹7 लाख, फ्लैट 601 (A विंग) – कीमत ₹1.10 करोड़, जमा सिर्फ ₹7 लाख, फ्लैट 601 (C विंग) – कीमत ₹1.75 करोड़, जमा ₹17.32 लाख, यानी कुल ₹2.55 करोड़ की रकम में से मात्र ₹31.32 लाख ही कंपनी के खाते में जमा किए गए। बाकी रकम कथित तौर पर कैश में लेकर गबन कर ली गई। जाधव परिवार बना कड़ी, कैश ट्रांजैक्शन पर सवाल?– जांच में सामने आया कि यह रकम राजू जाधव, प्रवीण जाधव और रानी जाधव से नकद रूप में ली गई थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी राशि कैश में क्यों ली गई और इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड क्यों नहीं रखा गया?, फ्लैट पर कब्जा बना नया विवाद- कंपनी को पूरी रकम नहीं मिलने के चलते फ्लैट्स का कब्जा नहीं सौंपा गया और उन्हें लॉक रखा गया। लेकिन 22 नवंबर 2025 को कथित तौर पर खरीदारों ने खुद इन फ्लैट्स पर कब्जा कर लिया, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है। दस्तावेज गायब – घोटाले की सबसे बड़ी कड़ी? एफआईआर में यह भी खुलासा हुआ है कि- एग्रीमेंट, भुगतान रसीद, पजेशन लेटर जैसे अहम दस्तावेज कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं किए गए। इससे पूरे ट्रांजैक्शन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इन धाराओं में केस दर्ज, नवघर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (आपराधिक न्यासभंग) और धारा 34 (साझा मंशा) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि 2018 से 2020 के बीच हुई इन घटनाओं की गहन जांच जारी है और आगे और खुलासे हो सकते हैं। रियल एस्टेट सेक्टर पर फिर उठे सवाल- यह मामला सिर्फ एक कंपनी का विवाद नहीं, बल्कि मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर में चल रही अपारदर्शिता और कैश ट्रांजैक्शन की समस्या को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है और सख्त नियमन की जरूरत और भी बढ़ जाती है। भरोसे का सौदा या करोड़ों का धोखा?- मुलुंड का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि रियल एस्टेट में निवेश करते समय सिर्फ प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि बिल्डर और उसकी साख की भी गहन जांच जरूरी है। फिलहाल सभी की नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं क्या इस घोटाले के पीछे और भी बड़े खुलासे होंगे?

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