गुटखा माफिया के खिलाफ संघर्ष को मिली जीत, FDA की सख्ती के बाद नवी मुंबई में कार्रवाई की मांग तेज
परमेश्वर सिंह | नवी मुंबई : महाराष्ट्र में प्रतिबंधित गुटखा कारोबार के खिलाफ वर्षों से चल रहे संघर्ष को एक नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा अवैध गुटखा नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत मिलने के बाद नवी मुंबई सहित कई क्षेत्रों में सक्रिय कथित गुटखा सिंडिकेटों पर शिकंजा कसने की मांग तेज हो गई है। 12 जून 2026 को महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंडे द्वारा जारी निर्देशों के बाद अवैध गुटखा कारोबार को केवल खाद्य सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन नहीं, बल्कि संगठित अपराध के दृष्टिकोण से भी देखने की चर्चा शुरू हो गई है। इससे उन लोगों में बेचैनी बढ़ गई है जो लंबे समय से प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।
संघर्ष, दबाव और फिर सफलता गुटखा विरोधी अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने के दौरान उन्हें अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई बार विरोध, दबाव और कथित फर्जी मुकदमों के जरिए पत्रकार एवं RTI कार्यकर्त्ता को कमजोर करने की कोशिशें हुईं, लेकिन जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दे को लेकर उनका संघर्ष जारी रहा। लोंगो का मानना है कि राज्य स्तर पर हुई यह पहल केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उन नागरिकों की जीत है जिन्होंने प्रतिबंधित पदार्थों के खुलेआम कारोबार के खिलाफ लगातार आवाज उठाई।
इसी बीच नवी मुंबई के APMC क्षेत्र को लेकर भी कई शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि APMC पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले APMC भाजी मार्केट और कोपरी गांव इलाके में प्रतिबंधित गुटखा कारोबार से जुड़े नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका जताई गई है। लोंगो का कहना है इन आरोपों में सच्चाई है मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि केवल छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क, भंडारण व्यवस्था, परिवहन तंत्र और आर्थिक लाभ प्राप्त करने वाले लोगों की जांच आवश्यक है। हालांकि संबंधित अधिकारियों अथवा विभागों की ओर से इस संबंध में आधिकारिक टिप्पणी MCOCA के तहत कार्यवाही की बात सामने आई है। जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा, विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू उत्पाद केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती हैं। कैंसर और अन्य घातक बीमारियों से जुड़े जोखिमों को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा गुटखे पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बावजूद यदि कहीं अवैध कारोबार जारी है तो उस पर प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है। नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने माँग किया है, नवी मुंबई के संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष संयुक्त अभियान चलाया जाए और अवैध गुटखा कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच की जाए। उनका कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर किसी व्यक्ति, व्यापारी, दलाल या अन्य संबंधित तत्व की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। गुटखा विरोधी अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्षों की मेहनत, शिकायतों, जनजागरण और कानूनी प्रयासों के बाद अब व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि समाज को नशामुक्त और स्वस्थ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। “संघर्ष लंबा था, रास्ता कठिन था, लेकिन जनहित की लड़ाई जारी रही। आज जब अवैध गुटखा नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात हो रही है, तो यह उन सभी लोगों के प्रयासों की जीत है जिन्होंने सत्य और कानून के पक्ष में आवाज उठाई।”
