हे गोरी महकता जैसे पराग। संतोष पाण्डेय
देहिया भईल फुलवरिया हे गोरीचहु ओर महकता जैसे परागहथवा ले गुललवारिझाइल बा मनवामलई देतु गलवा गुलालहे गोरी महकता जैसे पराग
मनवा रिझाइल बातनी ताक हो गोरी मलई देतु गलवा गुलालगुललवा लगयिति!-->!-->!-->…
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